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डॉ मुखर्जी को राष्ट्रवाद की प्रतिबद्धता ने कांग्रेस पार्टी से किया अलग:— मदन राठौड़

.भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने शुक्रवार को डीडवाना में आपातकाल की 50वीं बरसी और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर आयोजित संगो​ष्ठी में कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन एवं देशहित में किए गए उनके संघर्षों की चर्चा करते हुए कहा कि डॉ मुखर्जी असाधारण प्रतिभा, अद्धितीय मेधा के धनी थे। महज 32 वर्ष की आयु में वे कोलकाता विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर बने। 1935 में वे विधायक बने और 1936 में बंग-भंग आंदोलन के विरोध में उन्होंने विधायकी से इस्तीफा दे दिया। उस समय बंगाल में हिंदुओं को उनके घरों से निकाल कर जबरन कब्जा किया गया, जिसका उन्होंने तीव्र विरोध किया। उन्होंने बताया कि सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें कांग्रेस पार्टी से अलग ले गई।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि डॉ मुखर्जी ने दो विधान, दो प्रधान और दो निशान के खिलाफ आवाज उठाई और नेहरू मंत्रिमंडल से इस्तीफा दिया। डॉ. मुखर्जी ने सत्य और राष्ट्रहित के लिए मंत्री पद त्याग किया। उन्होंने बताया कि मुखर्जी ने पं. दीनदयाल उपाध्याय और अटल बिहारी वाजपेयी के साथ मिलकर जनसंघ की स्थापना की थी। पहले ही चुनाव में पार्टी ने 3 सांसद और 23 विधायक जीतकर राजनीतिक विकल्प के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। एक देश, एक विधान की भावना को लेकर वे मई 1953 को बिना परमिट कश्मीर गए, जहां उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। 23 जून 1953 को रहस्यमय परिस्थितियों में उनकी मृत्यु हो गई। राठौड़ ने आरोप लगाया कि उस समय की कांग्रेस सरकार ने इस संदिग्ध मृत्यु की जांच तक नहीं करवाई। उन्होंने कहा कि देश का विभाजन केवल ब्रिटिश नीति का परिणाम नहीं था, बल्कि तत्कालीन कांग्रेस नेतृत्व, विशेष रूप से जवाहरलाल नेहरू की प्रधानमंत्री बनने की लालसा का भी नतीजा था।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने आपातकाल को लोकतंत्र और संविधान की हत्या का दिन बताया। उन्होंने कहा कि 25 जून 1975 को लागू की गई इमरजेंसी कांग्रेस द्वारा सत्ता की लालसा में की गई तानाशाही का प्रतीक थी। उन्होंने कहा कि उस दौरान लाखों लोगों को रातों-रात गिरफ्तार किया गया, प्रेस पर सेंसरशिप थोप दी गई, न्यायपालिका को कमजोर किया गया और लोगों की संपत्तियों तक पर मनमर्जी से कब्जा किया गया। राठौड़ ने 6 अगस्त 1975 को लाए गए उस कानून का उल्लेख किया, जिसके तहत आपातकाल के खिलाफ कोई अपील तक नहीं की जा सकती थी। उन्होंने कहा कि आज कांग्रेस ‘संविधान बचाओ यात्रा’ निकाल रही है, जबकि इतिहास गवाह है कि इसी पार्टी ने संविधान और जनता के अधिकारों की सबसे बड़ी हत्या की थी। कार्यक्रम में राठौड़ ने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे डॉ. मुखर्जी के बलिदान और आपातकाल के अत्याचारों को जन-जन तक पहुंचाएं, ताकि आने वाली पीढ़ियां सच्चे इतिहास से परिचित रह सकें। कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष नाहर सिंह जोधा, भाजपा प्रदेश कोषाध्यक्ष पंकज गुप्ता, भाजपा प्रदेश मंत्री भूपेंद्र सैनी, मान सिंह जी किंसरिया, अशोक सैनी सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, भाजपा जिलाध्यक्ष, जिला पदाधिकारी, कार्यकर्ता उपस्थित रहें। इससे पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ का नावां, मकराना, डीडवाना सहित कई स्थानों पर बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने भव्य स्वागत—संत्कार किया।

 

 

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Author: Kashish Bohra

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