अजमेर में हुए ऑनर किलिंग (सहदेव हत्याकांड) के मामले में एक ओर फरार आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी मर्डर के समय मौके पर मौजूद था और सहदेव का चाचा ससुर (करिश्मा का चाचा) है। इस मामले में 8 आरोपी पहले ही पकडे़ जा चुके है।
सहदेव का अजमेर बस स्टैंड से किडनैप किया गया और पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। इसके बाद जायल (नागौर) के एक गांव के खेत में शव फेंक दिया था। अब तक इस मामले में 9 लोगों को गिरफ्तारी हो चुकी है।
सिविल लाइन थाना प्रभारी शम्भूसिंह ने बताया-गिरफ्तार आरोपी तेजासर निवासी रामनिवास है। रामनिवास मर्डर के समय करिश्मा के चाचा व सहदेव हत्याकांड के मास्टर माइंड रामकिशोर चौधरी, कैंपर चालक कैलाश राम के साथ मौजूद था। आरोपी की पुलिस तलाश कर रही थी और उसका फोन भी सर्विलांस पर था। फोन की लोकेशन के आधार पर उसका मेड़ता से पीछा किया और अजमेर में पुलिस टीम ने आरोपी को दबोच लिया।
पुलिस अब तक इस मामले में बस्तीराम चौधरी, रामकिशोर चौधरी, रामप्रसाद चौधरी, ललिता चौधरी, महिपाल चौधरी, ओमप्रकाश, कुन्नाराम, कैलाश राम को गिरफ्तार कर चुकी है। गिरफ्तार आरोपी रामनिवास से पुलिस पूछताछ कर रही है। साथ ही मामले में जांच जारी है।
अजमेर से किडनैप कर किया सहदेव का मर्डर
करिश्मा धारणा गांव की रहने वाली थी। महज 11-12 साल की थी, तब माता-पिता और परिवार वालों ने उसका बाल विवाह कर दिया था। उसने बाल विवाह स्वीकार नहीं किया था। तरनाऊ गांव में नर्सिंग की पढ़ाई के दौरान कॉलेज में पढ़ाने वाले टीचर सहदेव भाकर से प्यार हो गया था। तब सहदेव के साथ जीवन बिताने की कसमें खाईं थी। उसके बाद सहदेव भाकर के घर रातंगा गांव में ही दोनों रहने लगे थे।
करिश्मा के परिवार ने सहदेव को जान से मारने की धमकी दी थी। 13 जून को सुबह सहदेव और उसका दोस्त हरेंद्र के साथ अजमेर में नर्स भर्ती का एग्जाम देने गए थे। एग्जाम के बाद वो दोनों घर लौटने के लिए 1 बजे अजमेर के रोडवेज बस स्टैंड पर पहुंचे थे। यहां से ही सहदेव का किडनैप किया गया और फिर पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। 26 जून को करिश्मा ने भी सहदेव के घर में सुसाइड कर लिया था।
ऑनर किलिंग के अलग-अलग किरदार
बस्तीराम चौधरी- करिश्मा का पिता है। बेटी करिश्मा के घर से भागने और लिव-इन में रहने से नाराज था। सहदेव की हत्या में अपने भाई के साथ शुरुआत से अहम रोल रहा। अजमेर बस स्टैंड से जिस कैंपर गाड़ी में सहदेव का किडनैप किया गया था। उस गाड़ी में आरोपी बस्तीराम भी सवार था। बस्तीराम सहदेव को अपने भाई और अन्य रिश्तेदारों के हवाले कर बड़ी बेटी ललिता और दामाद महिपाल के साथ रास्ते में उतर गया था। वारदात के बाद पुलिस को चकमा देने के लिए 3 रातें गांव के खेत में पेड़ पर गुजारी।
रामकिशोर चौधरी- करिश्मा का चाचा है और सहदेव हत्याकांड का मास्टरमाइंड है। इसने ही सहदेव को पीट-पीटकर जान से मारा था। हत्याकांड के 9 महीने पहले से सहदेव को मारने की प्लानिंग शुरू कर दी थी। सिर्फ मौके का इंतजार कर रहा था। इसने सहदेव को धमकी भी दी थी कि तूने मेरी भतीजी को श्राद्धों में भगाया है, अगला श्राद्ध तेरा होगा।
रामप्रसाद चौधरी- यह भी करिश्मा का चाचा है। जिस कैंपर में सहदेव का किडनैप किया गया था। उस गाड़ी का मालिक रामप्रसाद ही है। किडनैपिंग के दौरान गाड़ी में ही बैठा था।
ललिता चौधरी- करिश्मा की बड़ी बहन है। अजमेर रोडवेज बस स्टैंड पर सहदेव से बात करने लगी। थोड़ी देर में कैंपर आई और उसमें बैठे बस्तीराम और रामप्रसाद जबरन सहदेव को गाड़ी में पटककर ले गए।
महिपाल चौधरी- करिश्मा का जीजा है। महिपाल अपनी पत्नी ललिता को एग्जाम दिलवाने अजमेर लाया था। अजमेर बस स्टैंड पर महिपाल भी मौजूद था। सहदेव को किडनैप करने में मदद की थी।
ओमप्रकाश- करिश्मा के जीजा महिपाल का रिश्तेदार है। सहदेव की किडनैपिंग से लेकर हत्या तक की पूरी घटना पर ओमप्रकाश नजर रखे हुए था।
कुन्नाराम- करिश्मा के पहले पति का चाचा है। करिश्मा का उसके परिवार ने बाल विवाह किया था। बड़ी होने पर उसने इस शादी को मानने से मना कर दिया था। कुन्नाराम इस बात से नाराज था कि उसके भाई के बेटे की पत्नी को कोई भागकर ले गया। इससे समाज में उनकी छवि खराब हुई थी। वह ओमप्रकाश से घटना की पूरी जानकारी लेता था।
कैलाश राम- जिस कैंपर में सहदेव का किडनैप हुआ। उस गाड़ी को कैलाश राम चला रहा था। हत्या के बाद गाड़ी को सुनसान जगह पर छोड़कर भाग गया था।
