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जयपुर में फेक आधार कार्ड का खेल, बदमाश अरेस्ट:जाली डॉक्यूमेंट से लेता था सिमकार्ड, साइबर क्रिमिनल्स को था बेचता

जयपुर पुलिस ने फेक आधार कार्ड से मोबाइल सिमकार्ड लेकर साइबर क्रिमिनल्स को बेचने वाले रैकेट का बुधवार को पर्दाफाश किया है। मालपुरा गेट इलाके में दबिश देकर पुलिस ने शातिर साइबर क्रिमिनल को अरेस्ट किया है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 7 मोबाइल सिमकार्ड, 2 खाली मोबाइल सिम कवर, 2 आधार कार्ड व एक मोबाइल जब्त किया है। पुलिस फिलहाल आरोपी से पूछताछ कर रही है, जिसमें कई बड़े खुलासे होने की संभावना है।

एसपी (साइबर क्राइम) शांतनु कुमार ने बताया- साइबर क्राइम में आरोपी घनश्याम मीणा (19) निवासी निवाई टोंक को अरेस्ट किया गया है। जिसके कब्जे से 7 मोबाइल सिम कार्ड, 2 खाली मोबाइल सिम कवर, 2 आधार कार्ड और एक वीवो कंपनी का मोबाइल जब्त किया गया है। बरामद किए गए आधार कार्ड पर आरोपी घनश्याम मीणा की खुद की फोटो लगी थी, लेकिन नाम और पते अलग-अलग थे। जांच में सामने आया कि आरोपी अपने मोबाइल में अन्य व्यक्तियों के आधार कार्ड ऑनलाइन डाउनलोड करता था।

प्ले स्टोर से एप्लिकेशन डाउनलोड कर उन आधार कार्डों में कांट-छांट करता था, अपनी फोटो लगाकर फर्जी तरीके से गलत नाम-पतों का नया आधार कार्ड बना लेता था। इसके बाद वह ई-मित्र से रंगीन प्रिंटआउट निकलवाकर वोडाफोन-एयरटेल स्टोर पर जाकर सिम कार्ड निकलवाता था। पूछताछ में यह भी सामने आया है कि वह इन फर्जी आधार कार्डों से प्राप्त सिम कार्डों को पैसे लेकर साइबर क्रिमिनल्स को बेचता था। पुलिस ने उसके अन्य सहयोगियों और उन स्टोरों के संबंध में जानकारी प्राप्त करने के लिए रिमांड पर लिया है। मामले में आगे की जांच जारी है।

ऐसे पकड़ा गया
एसपी (साइबर क्राइम) शांतनु कुमार सिंह ने बताया- मंगलवार को साइबर थाना पुलिस को सूचना मिली कि सांगानेर एयरटेल स्टोर पर एक संदिग्ध व्यक्ति ने डिजिटल केवाईसी प्रक्रिया के तहत एक मोबाइल सिम एक्टिव कराने के लिए आधार कार्ड दिया। एक मोबाइल नंबर को पोस्टपेड फेमिली प्लान के तहत अन्य दो मोबाइल नंबर से जोड़ने के लिए दिया। जिन मोबाइल नंबरों से जोड़ा जाना था वह किसी अन्य के आधार कार्ड से चालू थे।

शक होने पर कंपनी प्रतिनिधि ने स्टोर से कॉन्टैक्ट कर वीडियो कॉल के जरिए संदिग्ध की पहचान करवाई। इसमें यह बात सामने आई कि सिमकार्ड लेने के लिए प्रस्तुत आधार कार्ड पर अंकित फोटो इसी संदिग्ध व्यक्ति की थी, जबकि उसका नाम-पता और आधार नंबर पहले से दिए गए आधार कार्ड से अलग था। जाली डॉक्यूमेंट पेश कर आधार कार्ड के जरिए सिमकार्ड प्राप्त किए जा रहे है।

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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